सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने उत्तराखंड के आठ पर्वतीय जिलों में वाहनों की मैनुअल फिटनेस जांच में सशर्त छूट दे दी है। चार जिलों में 1 जुलाई और शेष चार जिलों में 31 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से एटीएस (ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन) तैयार करने होंगे। तय समय सीमा समाप्त होने के बाद मैनुअल फिटनेस पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।
उत्तराखंड में वर्तमान में लगभग 4.17 लाख कमर्शियल वाहन पंजीकृत हैं। पहले इन वाहनों की फिटनेस आरटीओ और एआरटीओ दफ्तरों में मैनुअल तरीके से होती थी। भारत सरकार द्वारा करीब 20 दिन पहले मैनुअल फिटनेस पर रोक लगाकर एटीएस के माध्यम से जांच अनिवार्य करने के आदेश दिए गए थे। पर्वतीय जिलों में एटीएस सेंटर न होने के कारण वाहन स्वामियों को सैकड़ों किलोमीटर दूर मैदानी इलाकों में आना पड़ रहा था, जिससे समय और धन की भारी बर्बादी हो रही थी। वाहन स्वामियों के भारी विरोध को देखते हुए परिवहन मुख्यालय ने केंद्र से छूट की मांग की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है। उत्तराखंड टैक्सी-मैक्सी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुंदर सिंह पंवार ने इस राहत के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा का आभार जताया है।
छूट का चरणबद्ध विवरण:
पहला चरण (1 जुलाई 2026): उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में मैनुअल फिटनेस बंद होगी। इन जिलों में एटीएस निर्माण की प्रक्रिया जारी है, जिसे 1 जुलाई तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरा चरण (31 दिसंबर 2026): टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर जिलों में 31 दिसंबर 2026 के बाद मैनुअल फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं हो सकेंगे। इन जिलों में एटीएस स्थापना की योजना पर तेजी से काम करने को कहा गया है।
क्यों जरूरी है ऑटोमेटेड फिटनेस?
केंद्र सरकार के अनुसार, केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत अब वाहनों की फिटनेस मशीनों द्वारा किया जाना अनिवार्य है। इससे जांच में पारदर्शिता आएगी, भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सड़कों पर चलने वाले अनफिट वाहनों की सटीक पहचान हो सकेगी, जिससे सड़क हादसों में कमी आएगी।












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