टिहरी और पौड़ी जनपद की सीमाओं को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित ‘बजरंग सेतु’ लगभग तैयार हो गया है। तीन वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, यह पुल स्थानीय निवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की आवाजाही के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस सेतु के शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन और परिवहन को नई गति मिलेगी। बजरंग सेतु के निर्माण से तपोवन और लक्ष्मणझूला क्षेत्र के बाशिंदों के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। वर्ष 2022 में लोक निर्माण विभाग (नरेंद्रनगर) द्वारा शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण में है। करीब 68.86 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह पुल आधुनिक इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। इस पुल की सबसे बड़ी विशेषता इसका पारदर्शी ‘ग्लास फ्लोर’ (कांच का फुटपाथ) है। पुल के दोनों किनारों पर डेढ़-डेढ़ मीटर चौड़ा और 65 मिमी मोटाई वाला पारदर्शी कांच लगाया गया है, जिस पर चलकर पर्यटक रोमांचित अनुभव करेंगे। 132.30 मीटर लंबे इस पुल की कुल चौड़ाई पांच मीटर रखी गई है, जो इसे पैदल आवाजाही के लिए बेहद सुरक्षित और भव्य बनाती है। पुल के सौंदर्य को आध्यात्मिक स्वरूप देने के लिए इसका मुख्य द्वार केदारनाथ मंदिर की आकृति में बनाया गया है। इसके साथ ही प्रवेश द्वार के दोनों ओर स्थापित विशाल शंख की आकृतियाँ इसकी भव्यता में चार चाँद लगा रही हैं। ऐतिहासिक लक्ष्मणझूला पुल के सुरक्षा कारणों से बंद होने के बाद, बजरंग सेतु अब उसके एक सशक्त और आकर्षक विकल्प के रूप में प्रतिष्ठित हो गया है।
बजरंग सेतु : उत्तराखंड में कांच का पुल तैयार













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